Friday, February 6, 2015

फरेबी भी हूँ,जिद्दी भी हूँ,और पत्थर दिल भी हूँ,मासूमियत खो दी है मैंने, वफा करते करते..!!



लिख दे मेरा अगला जनम उसके नाम पे ए खुदा, ,इस जनम में ईश्क थोडा कम पड गया है...

अजीब सा जहर है तेरी यादों मै, मरते मरते मुझे सारी ज़िन्दगी लगेगी

एक वकत था उसे मुज मे सब कुछ पसंद था एक वकत है उसे मेरे सीवा सब कुछ पसंद ह

कीस्मत की ये बात है कुछ दीन बाद समझ आएगी वर्ना हम दोनों में कोई गलत भी तो नही था

जिंदगी रही तो फिर होन्गी महेफिले गुफ्तगू अगर ईसी रात चल बसे तो सलाम आखरी...

~मुझसे नफरत ही करनी है तो इरादे मजबूत रखना.. जरा से भी चुके तो महोब्बत हो जायेगी..

बस यही सोच कर हर तपिश में जलते आये हैं, धूप कितनी भी तेज़ हो समंदर सुखा नहीं करते...

बस तुम्हेँ पाने की तमन्ना नहीँ रही... मोहब्बत तो आज भी तुमसे बेशुमार करतेँ हैँ. !!

'' मोहब्बत भी ईतनी शीद्दत से करो कि,वो धोखा दे कर भी सोचे के वापस जाऊतो किस मुंह से जाऊ..! ''

किस्मत बडी सही चीज है...अगर ईरादो मे दम हो तो साली पलट ही जाती है...

मुस्कुरा देता हूँ अक्सर देखकर पुराने खत तेरे, तू झूठ भी कितनी सच्चाई से लिखती थी...

खुदा करे अब मुझे मेरी मंजिल ही ना मिले .. बङी मुश्किल से तैयार हुई है वो साथ चलने को ...

किताबो की तरह बहुत से अल्फाज़ है मुझमें, और किताबो की तरह ही खामोश रहता हूँ मैं _

कैसे करु भरोसा गैरो के विश्वास पर। अपने ही मजा लेते है अपनो की हार पर।।

गुज़र गया आज का दिन भी पहले की तरह, न हमको फुर्सत मिली न उन्हें ख्याल आया…

ऐ खुदा मेंरी किस्मत से खेलना शौक है तेरा.. या तेरे दुसरे खिलोनो में मेरे जितना बर्दास्त करने की ताकत नहीं हे....

तुम मेरी बातों का जवाब नहीं देते तो कोई बातनहीं,आओगे जब हमारी कब्र परतो हमभी ऐसा ही करेंगे।

मैने कभी किसीको अपने दिल से दुर नही किया, बस जीनका दिल भर गया वो मुजसे दुर हो गया..!!

तुने तो रूला के रख दिया ऐ-जिदंगी, जाकर मेरी " मां " से पुछ कितने लाडले थे हम..!!

दोनों की पहली चाहत थी ,दोनों टूट के मिला करते थे ...वो वादे लिखा करती थी ,में कसमे लिखा करता था ।।

अकेले हम ही शामिल नहीं है इस जुर्म में जनाब , नजरे जब मिली थी मुस्कुराए तुम भी थे

इतनी बदसलूकी ना कर ए ज़िन्दगी, हम कोन्सा यहाँ बार बार आने वाले है...!

उसी से पूछ लो उसके इश्क की कीमत.. हम तो बस भरोसे पे बिक गए...!

राज तो हमारा हर जगह पे है…। पसंद करने वालों के “दिल” में ; और नापसंद करने वालों के “दिमाग” में…

ख़ुदा ने लिखा ही नहीं तुझको मेरी क़िस्मत में शायद, वरना खोया तो बहोत कुछ था एक तुझे पाने के लिए !!!!....

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